आवश्यकता - मास्लो द्वारा प्रतिपादित मानवीय आवश्यकताएं

Avashyakta

मास्लो द्वारा प्रतिपादित मानवीय आवश्यकताएं

Moslow's Hierachy of Human Needs

आवश्यकता का अर्थ किसी अभावयुक्त वस्तु से होता है। मानव वस्तुओं द्वारा अपनी इच्छाओं को तृप्त होते देखना चाहते हैं। तृप्तता की अनुभूति ही प्रयास की ओर धकेलती है। इससे मनुष्य का सामान्य व्यवहार प्रभावित होता है।

बर्नाड के शब्दों में- "A need is the lack of something which is present would tend to further the welfare of the organism or of the species or to facilities its useful behavior."

जब मानव की आवश्यकता की पूर्ति नहीं होती तो उसके जीवन में तनाव की स्थिति पैदा हो जाती है। इसी आधार पर आवश्यकता की अवधारणा और उससे सम्बन्धित तत्त्व अभिप्रेरणा से घनिष्ठ रूप में जुड़े रहते हैं। व्यक्ति अपने जीवन में जो भी व्यवहार करता है, उसके मूल में आवश्यकता महत्त्वपूर्ण भूमिका निर्वहन करती है।

इस प्रकार हम कह सकते हैं कि वह शक्ति जो व्यक्ति को किसी विशेष व्यवहार को करने हेतु प्रेरित करती है, आवश्यकता कहलाती है।

अभिप्रेरित आवश्यकताओं को दो भागों में विभाजित किया जा सकता है

  1. शारीरिक आवश्यकताएँ
  2. मानसिक आवश्यकताएँ

शारीरिक आवश्यकताओं की पूर्ति होने पर मानव व्यवहार का स्वरूप एक सन्तुष्टि में परिवर्तित हो जाता है।

इसी प्रकार मानसिक आवश्यकताएँ मानव व्यवहारों को निर्धारित करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इन आवश्यकताओं की पूर्ति जीवन में कभी नहीं होती।

अधिकांशत: मानव व्यवहार मानसिक (मनोवैज्ञानिक) आवश्यकताओं से नियन्त्रित किया जाता है।

इसी आधार पर अभिप्रेरणा की प्रकृति मनो-शारीरिक मानी गयी है।

मरे के आवश्यकता सिद्धान्त (Murry's need theory) एवं मॉस्लो के अभिप्रेरणा सिद्धान्त (Moslow's hierachy theory of motivation) में आवश्यकताओं की विशुद्ध व्याख्या की गयी है। इसमें मॉस्लो का सिद्धान्त अति उपयोगी है। मॉस्लो का सिद्धान्त अभिप्रेरणा के सन्दर्भ में अधिक सार्वजनिक, सार्थक तथा उपयोगी है।

मास्लो का आत्म-वास्तवीकरण या अभिक्रमिक आवश्यकता का सिद्धान्त

Maslow's Theory of Self Actualization or Need Hierarchy

मास्लो के सिद्धान्त का अर्थ (Meaning of Maslow's theory) - इस सिद्धान्त का प्रतिपादन अमेरिका के मनोवैज्ञानिक एवं दार्शनिक अब्राहम मास्लो (Abraham Maslow) ने किया। यह अभिप्रेरणा के क्षेत्र में बहुचर्चित एवं मान्य सिद्धान्त है।

अभिप्रेरणा के क्षेत्र में इसके पूर्व जितने सिद्धान्त थे मास्लो के आत्म-वास्तवीकरण के सिद्धान्त में लगभग सभी विचार समाहित हो गये हैं। अभिप्रेरणा के क्षेत्र में यह एक विस्तृत सिद्धान्त है।

न केवल शिक्षा के क्षेत्र में बल्कि समाज मनोविज्ञान, असामान्य मनोविज्ञान, औद्यौगिक मनोविज्ञान तथा अन्य अनेक क्षेत्रों में इस सिद्धान्त का प्रयोग किया जा रहा है।

मास्लो ने अपनी पुस्तकों- ए थ्योरी ऑफ ह्यूमन मोटीवेशन (A Theory of human motivation) और पर्सनलिटी एण्ड मोटीवेशन (Personality and motivation) में इस सिद्धान्त का वर्णन किया है।

  1. मास्लो के अनुसार,"अभिप्रेरणा कष्ट से बचने या आनन्द प्राप्ति की प्रक्रिया अथवा खिंचाव से मुक्ति प्राप्ति की प्रक्रिया नहीं है। आधारभूत आवश्यकताओं के अतिरिक्त व्यक्ति में आत्म-विश्वास तथा आत्म-वास्तवीकरण (Self-actualization) की भी आवश्यकताएँ हैं, जिसका प्रतिपादन मास्लो ने आत्म-वास्तवीकरण के सिद्धान्त (Theory of self-actualization) में किया है।
  2. मास्लो के अनुसार, "मानव जीवन का उद्देश्य आत्म-वास्तवीकरण (Self-actualization) है।"
  3. मास्लो के अनुसार, "आवश्यकताएँ एक क्रम में स्थित होती हैं। जब एक आवश्यकता की पूर्ति होती है तब उससे उच्च क्रम की आवश्यकता का प्रादुर्भाव होता है।"

मास्लो ने आवश्यकता की पद्धति का भी विकास किया तथा आवश्यकता को दो वर्गों में विभाजित किया है:-

  1. अभाव आवश्यकताएँ
  2. अभिवृद्धि आवश्यकताएँ
Avashyakta ka Vargikaran

अभाव आवश्यकताएँ (Deficiency Needs, D-needs)

  1. प्रथम आवश्यकता - शारीरिक आवश्यकता (First Need - Physical Need)
  2. द्वितीय आवश्यकता - सुरक्षा आवश्यकता (Second Need - Safety Need)
  3. तृतीय आवश्यकता - अपनत्व एवं प्यार की आवश्यकता (Third Need - Love and Belongingness)
  4. चतुर्थ आवश्यकता - सम्मान की आवश्यकता (Fourth Need - Esteem Need)

अभिवृद्धि की आवश्यकताएँ अथवा आत्म विकास एवं आत्म-वास्तवीकरण की आवश्यकताएँ (Growth needs, meta needs, being needs and B-needs)

  1. पंचम आवश्यकता - आत्म-वास्तवीकरण (Fifth Need - Self-Actualization)
  2. छठी आवश्यकता - ज्ञान और समझ (Sixth Need - Knowledge and Understanding)
  3. सातवीं आवश्यकता - सौन्दर्य आवश्यकताएँ (Seventh Need - Aesthetic Needs)