बुद्धि की प्रकृति या स्वरूप (Nature of Intelligence), बुद्धि एवं योग्यता

Buddhi Ki Prakriti

बुद्धि की प्रकृति या स्वरूप

(Nature of Intelligence)

मनोविज्ञान की उत्पत्ति से लेकर आज तक 'बुद्धि का स्वरूप' निश्चित नहीं हो पाया है। समय-समय पर जो परिभाषाएँ विद्वानों द्वारा प्रस्तुत की जाती रहीं, वह इसके एक पक्ष या विशेषता या क्षमता से सम्बन्धित थीं। अत: आज तक उपलब्ध सामग्री के अधार पर बुद्धि का स्वरूप तथा इसकी प्रकृति क्या है?

"बुद्धि की प्रकृति या स्वरूप का वर्णन हम निम्न प्रकार से करेंगे"

सीखने की योग्यता (Ability of learning)

भारतीय मनीषियों एवं ऋषियों ने 'ज्ञान' को जीवन का प्रमुख साधन एवं साध्य माना है। अत: जो व्यक्ति अधिक से अधिक ज्ञान ग्रहण कर लेता है; उसे समाज उच्च स्थान देता है। मनोवैज्ञानिकों ने अधिक से अधिक ज्ञान को ग्रहण करने वाली योग्यता को ही 'बुद्धि' माना है।

जैसा कि 'डियर वान' ने लिखा है- "बुद्धि सीखने या अनुभव से लाभ उठाने की क्षमता है।" (Intelligence is the capacity to learn or to profit by experience.)

समस्या समाधान की योग्यता (Ability to solve the problem)

प्रत्येक व्यक्ति को विकास के साथ-साथ विभिन्न प्रकार की समस्याओं का सामना करना होता है। जो व्यक्ति इन समस्याओं पर जितनी शीघ्र विजय प्राप्त कर लेता है या उनसे छुटकारा प्राप्त कर लेता है, वही सबसे अधिक बुद्धिमान माना जाता है। अतः समस्या समाधान में प्रयोग की गयी योग्यता ही 'बुद्धि' है।

जैसा रायबर्न ने लिखा है- "बुद्धि वह शक्ति है, जो हमको समस्याओं का समाधान करने और अपने उद्देश्यों को प्राप्त करने की क्षमता देती है।" (Intelligence is the power which unable us to solve problems and to achieve our purposes.)

अमूर्त चिन्तन की योग्यता (Ability of think abstractly)

प्रत्येक व्यक्ति दो प्रकार से चिन्तन प्रक्रिया को अपनाता है। प्रथम-मूर्त रूप से चिन्तन करके ज्ञान प्राप्त करना और द्वितीय-अमूर्त रूप से चिन्तन करके। अमूर्त रूप से तात्पर्य, जो चीजें हमारे समक्ष नहीं हैं उनका कल्पना तथा स्मृति के आधार पर ज्ञान प्राप्त करना। अत: अमूर्त चिन्तन में जो व्यक्ति अधिक सफल होता है, उसे बुद्धिमान कहा जाता है।

जैसा कि टरमैन (Terman) ने कहा है- "एक व्यक्ति उसी अनुपात में बुद्धिमान होता है, जितनी उसमें अमर्त चिन्तन की योग्यता होती है।" (An individual is intelligent in proportion as he is able to carry on abstract thinking.)

पर्यावरण से सामंजस्य की योग्यता (Ability of adjustment with environment)

प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवन में विकास करता है। विकास के समय सफलताएँ और असफलताएँ दोनों ही आती हैं। जो व्यक्ति दोनों में समाजीकरण एवं सामंजस्य करते हुए विकास करता है, उसे बुद्धिमान व्यक्ति माना जाता है या जो जितनी शीघ्र पर्यावरण को अपने अनुक्ल कर लेता है।

जैसा कि विलियम स्टर्न ने लिखा है- "जीवन की परिस्थितियों और नवीन समस्याओं में सामान्य मानसिक अनुकूलन ही बुद्धि है।" (Intelligence is a general mental adaptability to new problems and conditions of life.)

उपर्युक्त "बुद्धि की प्रकृति या स्वरूप" पर दिये मतों के दोष

उपर्युक्त मतों में निम्न दोष प्रतीत होते हैं-
  1. सीखने की योग्यता ही बुद्धि है, में दोष यह है कि शिक्षण और बुद्धि दोनों एक नहीं होते हैं। यह बुद्धि के एक पक्ष या एक संकुचित स्वरूप का वर्णन करती है।
  2. समस्या समाधान की योग्यता ही बुद्धि है, में दोष यह है कि जिन व्यक्तियों के जीवन में कोई समस्या नहीं होती, क्या उनमें बुद्धि नहीं है? और जो समस्याओं का समाधान नहीं कर पाते हैं; क्या उनमें भी बुद्धि नहीं है?
  3. अमूर्त चिन्तन की योग्यता ही बुद्धि है, में दोष यह है कि बुद्धि मूर्त और अमूर्त दोनों का ही चिन्तन करती है।
  4. पर्यावरण से सामंजस्य की योग्यता ही बुद्धि है, में दोष यह है कि सामंजस्य और बुद्धि दोनों एक नहीं होते हैं, बल्कि बुद्धि जन्मजात होती है और सामंजस्य अर्जित होता है।
बुद्धि के स्वरूप की परिवर्तनशीलता और विस्तार ने बुद्धि के बारे में विद्वानों की राय एकमत नहीं होने दी। अतः आज हम बुद्धि के स्वरूप को निर्धारित करते समय सृजनात्मकता (Creativity) पर विशेष ध्यान देंगे। यह ऐसा तत्त्व है, जिसके अन्तर्गत सभी पूर्व मत सीखना, सामंजस्य, अमूर्त चिन्तन और समस्या समाधान आते हैं।

इसके अतिरिक्त सृजनात्मकता (Creativity) का क्षेत्र विस्तृत है। यह किसी भी व्यक्ति की किसी एक योग्यता का निर्धारण नहीं करती है, बल्कि सम्पूर्ण मानसिक योग्यताओं का निर्धारण करती है, चाहे वे जन्मजात हों या अर्जित।

अत: हम बुद्धि की परिभाषा करते हुए कह सकते हैं- "बुद्धि एक व्यक्ति की जन्मजात योग्यता है, जिसका प्रकटीकरण सृजनात्मकता के द्वारा होता है।"

उपर्युक्त "बुद्धि की प्रकृति या स्वरूप" पर दिये मत की वैधता

उपर्युक्त मत की वैधता अभी निश्चित नहीं हो पायी है। अत: हम यहाँ पर निम्न विद्वानों की दो परिभाषाएँ विश्लेषित करेंगे जो सर्वप्रमुख है-

वैशलर के अनुसार बुद्धि की परिभाषा

"बुद्धि एक व्यक्ति की सोद्देश्य कार्य करने, तर्क पूर्वक सोचने और अपने पर्यावरण के साथ भली प्रकार व्यवहार करने की समुच्चय या ध्रुवीय योग्यता है।" (Intelligence is the aggregate or global capacity of the individual to act purposefully, to think rationally and to deal effectively with his environment.)

स्टोडार्ड के अनुसार बुद्धि की परिभाषा

"बुद्धि उन कार्यों को करने की योग्यता है, जिनमें कठिनाई, जटिलता, अमूर्तता, लक्ष्य प्राप्ति में अनुकूलन, सामाजिक मूल्य, मितव्ययता तथा मौलिकता का उद्गम होता है और विशिष्ट परिस्थितियों में ऐसे कार्यों को बनाये रखने की योग्यता होती है, जिनमें शक्ति को एकाग्र करने एवं संवेगात्मक बलों पर नियन्त्रण रखने की आवश्यकता होती है।" (Intelligence is the ability to undertake activities that are characterized by difficulty, complexity, abstractness, economy, adoptiveness to a goal, social value and the emergence of original and to maintain such activities under conditions that demand a concentration of energy and a resistance to emotional forces.)

'वैशलर' एवं 'स्टोडार्ड' की परिभाषाओं का विश्लेषण

'वैशलर' एवं 'स्टोडार्ड' की परिभाषाओं का यदि हम विश्लेषण करें तो निम्न विशेषताएँ स्पष्ट होती हैं-

1. जन्मजात योग्यता

बुद्धि जन्मजात होती है। प्रत्येक व्यक्ति इसे जन्म से लेकर ही उत्पन्न होता है। पर्यावरण का सहयोग उसे प्रखर करता है। विभिन्न विद्वानों ने इसके विकास को किशोरावस्था का मध्यकाल माना है।

2. एकीकरण

बुद्धि की रचना अनेक प्रकार की योग्यताओं के एकीकरण से होती है। इसीलिये व्यक्ति के प्रत्येक कार्य पर बुद्धि का प्रभाव पड़ता है। इसीलिये उसे समुच्चय या ग्लोबीय योग्यता कहते हैं।

3. लक्ष्य प्राप्ति

बुद्धि सदैव व्यक्ति को लक्ष्य प्राप्त करने में सहायता देती है।

4. समायोजन

बुद्धि के निर्माण के द्वारा ही व्यक्ति जीवन की सफलताओं एवं असफलताओं में समायोजन स्थापित करता है या तो वह स्वयं में परिवर्तन कर लेता है या उसने पर्यावरण में परिवर्तन कर देता है।

5. कठिनता एवं जटिलता

कठिनता से तात्पर्य है कि बच्चे में उसकी शारीरिक आयु में वृद्धि के साथ-साथ कठिन कार्यों को करने की क्षमता स्वतः ही उत्पन्न होनी चाहिये। जटिलता से यह तात्पर्य है कि कितने कार्यों को सफलतापूर्वक किया जा सकता है। जो व्यक्ति अधिक से अधिक कार्यों को कर सकता है, उसे अधिक बद्धिमान माना जाता है

6. अमूर्तता

प्रतीकात्मक चिन्तन करना ही अमूर्तता होता है। यह बुद्धिमान व्यक्तियों का विशिष्ट लक्षण माना जाता है।

7. मितव्ययता

इससे तात्पर्य है कि जो व्यक्ति कम समय में अधिक कार्य कर लेते हैं, वे बुद्धिमान व्यक्ति कहलाते हैं।

8. सामाजिक मूल्य

बुद्धिमान व्यक्ति समाज का विरोधी हो सकता है, लेकिन सामाजिक मूल्यों का नहीं। अत: व्यक्ति सामाजिक मूल्यों को स्वतः ही ग्रहण करता है।

9. मौलिकता का उद्गम

इसका अर्थ है कि व्यक्ति में नवीन एवं भिन्न योग्यताओं का निर्माण करने की क्षमता हो; जैसे-नवीन वैज्ञानिक नियम का विकास करना, मशीन की डिजायन बनाना आदि।

उपर्युक्त विद्वानों के मत अपने-अपने दृष्टिकोण से बुद्धि की व्याख्या करते हैं। यदि गहरायी से देखा जाय तो बुद्धि एक प्रकार का निष्पादन है; जैसे- सीखने की योग्यता, नवीन परिस्थितियों में अपने ज्ञान को उपयोग में लाने की योग्यता तथा समस्याओं को हल करने की योग्यता

बुद्धि एवं योग्यता

(Intelligence and Ability)

बुद्धि की प्रकृति को स्पष्ट करने के लिये यह जानना भी आवश्यक है कि बुद्धि, कौशल (Skill) नहीं होती और न ही स्मृति या प्रतिभा होती है। यहाँ तक कि ज्ञान को भी बुद्धि नहीं कहा जा सकता। बुद्धि अमूर्त (Abstract), यान्त्रिक और सामाजिक होती है।

वेशलर (Wechsler) ने बुद्धि में इन योग्यताओं को सम्मिलित किया है-

  1. उद्देश्यपूर्ण कार्य करने की योग्यता।
  2. तर्कपूर्ण चिन्तन करने की योग्यता।
  3. वातावरण में प्रभावशाली ढंग से व्यवहार करना।
अतः इस विचार के अनुसार बुद्धि इन तत्त्वों की एक संयुक्त योग्यता होती है। बुद्धि का रुचि, अभिवृत्ति, प्राप्त ज्ञान एवं कौशल के साथ सफलता प्राप्त कराने में प्रमुख योगदान रहता है, इसे विवेक भी कहा जा सकता है।

मानसिक विकास

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