द्विवेदी युग के कवि और उनकी रचनाएँ - रचना एवं रचनाकर

Dwivedi Yug Ke Kavi & Rachnaye
द्विवेदी युग का साहित्य अनेक अमूल्य रचनाओं का सागर है, इतना समृद्ध साहित्य किसी भी दूसरी भाषा का नहीं है और न ही किसी अन्य भाषा की परम्परा का साहित्य एवं रचनाएँ अविच्छिन्न प्रवाह के रूप में इतने दीर्घ काल तक रहने पाई है। द्विवेदी युग के कवि और उनकी रचनाएँ; द्विवेदी युग की रचनाएँ और रचनाकार उनके कालक्रम की द्रष्टि से बहुत महत्वपूर्ण हैं। द्विवेदी युग की मुख्य रचना एवं रचयिता या रचनाकार इस list में नीचे दिये हुए हैं। द्विवेदी युग के कवि और उनकी रचनाएँ

द्विवेदी युग के कवि और उनकी रचनाएँ

क्रम रचनाकार द्विवेदीयुगीन रचना
1. नाथूराम शर्मा 'शंकर' अनुराग रत्न, शंकर सरोज, गर्भरण्डा रहस्य, शंकर सर्वस्व
2. श्रीधर पाठक वनाष्टक, काश्मीर सुषमा, देहरादून, भारत गीत, जार्ज वंदना (कविता), बाल विधवा (कविता)
3. महावीर प्रसाद द्विवेदी काव्य मंजूषा, सुमन, कान्यकुब्ज अबला-विलाप
4. ‘हरिऔध' प्रियप्रवास, पद्यप्रसून, चुभते चौपदे, चोखे चौपदे, बोलचाल, रसकलस, वैदेही वनवास
5. राय देवी प्रसाद ‘पूर्ण स्वदेशी कुण्डल, मृत्युंजय, राम-रावण विरोध, वसन्त-वियोग
6. रामचरित उपाध्याय राष्ट्र भारती, देवदूत, देवसभा, विचित्र विवाह, रामचरित-चिन्तामणि (प्रबंध)
7. गयाप्रसाद शुक्ल ‘सनेही डो' कृषक क्रन्दन, प्रेम प्रचीसी, राष्ट्रीय वीणा, त्रिशूल तरंग, करुणा कादंबिनी।
8. मैथिली शरण गुप्त रंग में भंग, जयद्रथ वध, भारत भारती, पंचवटी, झंकार, साकेत, यशोधरा, द्वापर, जय भारत, विष्णु प्रिया
9. रामनरेश त्रिपाठी मिलन, पथिक, स्वप्न, मानसी
10. बाल मुकुन्द गुप्त स्फुट कविता
11. लाला भगवानदीन ‘दीन' न' वीर क्षत्राणी, वीर बालक, वीर पंचरत्न, नवीन बीन
12. लोचन प्रसाद पाण्डेय प्रवासी, मेवाड़ गाथा, महानदी, पद्य पुष्पांजलि
13. मुकुटधर पाण्डेय पूजा फूल, कानन कुसुम

द्विवेदी युग (1900 ई०-1920 ई०)

द्विवेदी युग 20वीं सदी के पहले दो दशकों का युग है। इन दो दशकों के कालखण्ड ने हिन्दी कविता को श्रृंगारिकता से राष्ट्रीयता, जड़ता से प्रगति तथा रूढ़ि से स्वच्छंदता के द्वार पर ला खड़ा किया।

इस कालखंड के पथ प्रदर्शक, विचारक और सर्वस्वीकृत साहित्य नेता आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी के नाम पर इसका नाम द्विवेदी युग रखा गया है।

यह सर्वथा उचित है क्योंकि हिन्दी के कवियों और लेखकों की एक पीढ़ी का निर्माण करने, हिन्दी के कोश निर्माण की पहल करने, हिन्दी व्याकरण को स्थिर करने और खड़ी बोली का परिष्कार करने और उसे पद्य की भाषा बनाने आदि का श्रेय बहुत हद तक महावीर प्रसाद द्विवेदी को ही है।
  • द्विवेदी युग को ‘जागरण-सुधार काल' भी कहा जाता है।
इस प्रष्ठ में द्विवेदी युग का साहित्य, काव्य, रचनाएं, रचनाकार, साहित्यकार या लेखक दिये हुए हैं। द्विवेदी युग की प्रमुख कवि, काव्य, गद्य रचनाएँ एवं रचयिता या रचनाकार विभिन्न परीक्षाओं की द्रष्टि से बहुत ही उपयोगी है।