वस् धातु के रूप - Vas Dhatu Roop - Sanskrit

Vas Dhatu

वस् धातु (रहना/निवास करना, to dwell): वस् धातु भ्वादिगणीय धातु शब्द है। अतः Vas Dhatu के Dhatu Roop की तरह वस् जैसे सभी भ्वादिगणीय धातु के धातु रूप (Dhatu Roop) इसी प्रकार बनाते है।
वस् धातु का गण (Conjugation): भ्वादिगण (प्रथम गण - First Conjugation)
वस् का अर्थ: वस् का अर्थ रहना/निवास करना, to dwell होता है।

वस् के धातु रूप (Dhatu Roop of Vas) - परस्मैपदी

वस् धातु के धातु रूप संस्कृत में सभी लकारों, पुरुष एवं तीनों वचन में वस् धातु रूप (Vas Dhatu Roop) नीचे दिये गये हैं।

1. लट् लकार - वर्तमान काल

पुरुष एकवचन द्विवचन वहुवचन
प्रथम पुरुष वसति वसत: वसन्ति
मध्यम पुरुष वससि वसथः वसथ
उत्तम पुरुष वसामि वसावः वसामः

2. लोट् लकार - अनुज्ञा

पुरुष एकवचन द्विवचन वहुवचन
प्रथम पुरुष वसतु वसताम् वसन्तु
मध्यम पुरुष वस वसतम् वसत
उत्तम पुरुष वसानि वसाव वसाम

3. लङ् लकार - भूतकाल

पुरुष एकवचन द्विवचन वहुवचन
प्रथम पुरुष अवसत् अवसातम् अवसन्
मध्यम पुरुष अवसः अवसतम् अवसत
उत्तम पुरुष अवसम् अवसाव अवसाम

4. विधिलिङ् लकार - चाहिए के अर्थ में

पुरुष एकवचन द्विवचन वहुवचन
प्रथम पुरुष वसेत् वसेताम् वसेयुः
मध्यम पुरुष वसेः वसेतम् वसेत
उत्तम पुरुष वसेयम् वसेव वसेम

5. लृट् लकार - भविष्यत्

पुरुष एकवचन द्विवचन वहुवचन
प्रथम पुरुष वत्स्यति वत्स्यतः वत्स्यन्ति
मध्यम पुरुष वत्स्यसि वत्स्यथः वत्स्यथ
उत्तम पुरुष वत्स्यामि वत्स्यावः वत्स्यामः
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