हु (हवन करना) धातु के रूप - Hu Ke Dhatu Roop - संस्कृत

Hu Dhatu

हु धातु (हवन करना, to sacrifice): हु धातु ह्वादिगण धातु शब्द है। अतः Hu Dhatu के Dhatu Roop की तरह हु जैसे सभी ह्वादिगण धातु के धातु रूप (Dhatu Roop) इसी प्रकार बनाते है, संस्कृत व्याकरण में हु धातु रूप का अति महत्व है।
हु धातु का गण (Conjugation): ह्वादिगण तृतीय गण - Third Conjugation
हु का अर्थ: हु का अर्थ हवन करना, to sacrifice होता है।

हु के धातु रूप (Dhatu Roop of Hu) - परस्मैपदी

हु धातु के धातु रूप संस्कृत में सभी लकारों, पुरुष एवं तीनों वचन में हु धातु रूप (Hu Dhatu Roop) नीचे दिये गये हैं।

1. लट् लकार हु धातु - वर्तमान काल

पुरुष एकवचन द्विवचन वहुवचन
प्रथम पुरुष जुहोति जुहुत: जुह्वति
मध्यम पुरुष जुहोषि जुहथः जुहथ
उत्तम पुरुष जुहोमि जुहुवः जुहुमः

2. लोट् लकार हु धातु - अनुज्ञा

पुरुष एकवचन द्विवचन वहुवचन
प्रथम पुरुष जुहोतु जुहुताम् जुह्वतु
मध्यम पुरुष जुहुधि जुहुतम् जुहुत
उत्तम पुरुष जुहवानि जुहुवाव जुहवाम

3. लङ् लकार हु धातु - भूतकाल

पुरुष एकवचन द्विवचन वहुवचन
प्रथम पुरुष अजुहोत् अजुहुताम् अजुहवुः
मध्यम पुरुष अजुहोः अजुहुतम् अजुहुत
उत्तम पुरुष अजुहवम् अजुहुव अजुहुम

4. विधिलिङ् लकार हु धातु - चाहिए के अर्थ में

पुरुष एकवचन द्विवचन वहुवचन
प्रथम पुरुष जुहुयात् जुहुयाताम् जुहुयुः
मध्यम पुरुष जुहुयाः जुहुयातम् जुहुयात्
उत्तम पुरुष जुहुयाम् जुहुयाव जुहुयाम

5. लृट् लकार हु धातु - भविष्यत्

पुरुष एकवचन द्विवचन वहुवचन
प्रथम पुरुष होष्यति होष्यतः होष्यन्ति
मध्यम पुरुष होष्यसि होष्यथः होष्यथ
उत्तम पुरुष होष्यामि होष्यावः होष्यामः
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