Karm Karak - Dwitiya Vibhakti
कर्म कारक - वह वस्तु या व्यक्ति जिस पर वाक्य में की गयी क्रिया का प्रभाव पड़ता है वह कर्म कारक कहलाता है। कर्म कारक का विभक्ति चिन्ह ‘को’ होता है। अथवा - वाक्य में हो रहे कार्य का फल अर्थात प्रभाव जिसपर पड़ता है, उसे कर्म कारक कहते हैं।

कर्म कारक द्वितीया विभक्ति - संस्कृत

1. कर्तुरीप्सिततमं कर्म

कर्ता की अत्यन्त इच्छा जिस कार्य को करने में लगे उसे। कर्म कारक कहते हैं। जैसे-
  • रमेशः संस्कृतं पठति । रमेश संस्कृत पढ़ता है। 
  • अयं बालः ओदनं भुङ्क्ते। यह बालक चावल खाता है।

2. कर्मणि द्वितीया

कर्म कारक में द्वितीया विभक्ति होती है। जैसे-
  • अंशु फलं खादति । अंशु फल खाती है ।

3. अभितः परितः, सर्वतः उभयतः योगे द्वितीया

अभितः (दोनों ओर), परितः (चारों ओर), सर्वतः (सब ओर) और उभयतः (दोनों ओर) के योग में द्वितीया विभक्ति होती है। जैसे—
  • ग्रामं परितः वृक्षाः सन्ति । गाँव के चारों ओर वृक्ष हैं। 
  • विद्यालयम् अमितः पर्वताः सन्ति । विद्यालय के दोनों ओर पहाड़ हैं। 
  • मम् गृहं उभयतः वृक्षौ स्तः । मेरे घर के दोनों ओर दो वृक्ष हैं।

4. प्रत्यनुधिङनिकषान्तरान्तरेणयावद्भिः 

प्रति (ओर), अनु (पीछे), धिक् (धिक्कार), निकषा (निकट), अन्तरा (बीच में), अन्तरेण (बिना), यावत् (तक) आदि शब्दों के योग में द्वितीया विभक्ति होती है। जैसे-
  1. दीन प्रति दयां कुरु । दीनों (गरीबों) पर दया करो। 
  2. रामम् अनुगतः लक्ष्मणः । राम के पीछे लक्ष्मण गया। 
  3. धिक् पापिनं जनम् । पापीजन को धिक्कार है। 
  4. बी.पी.एस. विद्यालयं निकषा क्रीडाक्षेत्रं वर्तते । बी.पी.एस. विद्यालय के निकट खेल का मैदान है। 
  5. त्वां मां च अन्तरा कोऽस्ति ? तुम्हारे और मेरे बीच कौन है? 
  6. अध्ययनम् अन्तरेण ज्ञानं न भवति । अध्ययन के बिना ज्ञान नहीं होता है । 
  7. नगरं यावत् पर्वताः सन्ति । नगर तक पहाड़ हैं।

5. अधिशीड्स्थासां कर्म

‘अधि’ उपसर्ग के रहने पर शी, स्था और आस् के योग में द्वितीया विभक्ति होती है। जैसे-
  1. रणधीरः शय्याम् अधिशेते। रणधीर शय्या पर सोता है।
  2. विश्वजीतः गृहम् अधितिष्ठति । राजा प्रासादम् अध्यास्ते।
Note: यहाँ साधारण नियम के अनुसार सप्तमी विभक्ति होनी चाहिए थी।

6. उपान्चध्यावसः 

उप, अनु, अधि और आ उपसर्ग के बाद यदि वसु धातु आया। तो सप्तमी के स्थान पर द्वितीया विभक्ति होती है। जैसे-
  • सः वनम् उपवसति । वह वन में रहता है। 
  • हरि बैकुण्ठम् अनुवसति । अधिवसति/आवसति/विष्णु बैकुण्ठ में रहते हैं।

7. क्रुधुद्रुहोरुपसृष्टयोः 

कर्म ‘क्रध्’ और ‘दुह' क्रियाएँ उपसर्ग युक्त हों तो द्वितीया और उपसर्ग-रहित हों तो चतुर्थी विभक्ति होती है।  जैसे-
  • प्रभुः भृत्यम् अभिक्रुध्यति । (उपसर्ग-युक्त), 
  • प्रभुः भृत्याय क्रुध्यति । (उपसर्ग-रहित)

8. क्रियाविशेषणे द्वितीया

क्रियाविशेषण में द्वितीया विभक्ति होती है।  जैसे-
  • सः मधुरं गायति । वह मधुर गाता है।
  • मेघाः मन्दं मन्दं गर्जन्ति । मेघ धीरे-धीरे गरजते हैं।
  • मन्द-मन्दं वहति पवनः । हवा धीरे-धीरे बहती है।

9. कालाध्वनोरत्यन्तसंयोगे द्वितीया

कालवाची और मार्गवाची शब्दों में यदि क्रिया का अतिशय लगाव या व्याप्ति हो तो द्वितीया विभक्ति होती है। जैसे -
  •  क्रोशं कुटिला नदी । एक कोस तक नदी टेढ़ी है। 
  • मासम् व्याकरणम् अपठत् । एक मास में व्याकरण पढ़ा।

कर्म कारक के उदाहरण - हिन्दी

  • गोपाल ने राधा को बुलाया।
  • रामू ने घोड़े को पानी पिलाया।
  • माँ ने बच्चे को खाना खिलाया।
  • मेरे दोस्त ने कुत्तों को भगाया।
  • अध्यापक छात्रों को पीटता है।

1. सीता ने गीता को बुलाया।

ऊपर दिए गए वाक्य में जैसा कि आपने देखा को शब्द का प्रयोग हो रहा है। यह कर्म कारक का विभक्ति चिन्ह है। इससे हमें यह पता चलता है कि वाक्य में कि गयी क्रिया का असर गीता पर पड़ रहा है। अतः गीता कर्म कहलाएगी। अतएव यह उदाहरण कर्म कारक के अंतर्गत आयेगा।

2. मम्मी ने बालक को समझाया।

जैसा कि आप ऊपर दिए गए उदाहरण में देख सकते हिं की को विभक्ति चिन्ह का प्रयोग किया जा रहा है। इस से हमें कर्म का अर्थात वह व्यक्ति जिस पर क्रिया का प्रभाव का पता चल रहा है। यहाँ पर बालक कर्म कहलायेगा। अतः यह उदाहरण कर्म कारक के अंतर्गत आयेग।

3. बड़े लोगों को सम्मान देना चाहिए।

ऊपर दिए गए वाक्य में आप देख सकते हैं कि को विभक्ति चिन्ह का प्रयोग किया गया है। यह चिन्ह हमें बताता है की वाक्य में कि गयी क्रिया का असर किस व्यक्ति या वस्तु पर पड़ रहा है। यहाँ कर्म बड़े लोग हैं। अतएव ये उदाहरण कर्म कारक के अंतर्गत आएगा।

4. राम ने रावण को मारा।

जैसा कि आप ऊपर दिए गए वाक्य में देख सकते हैं की मारने की क्रिया कि जा रही है। इस क्रिया का असर रावण पर पड़ रहा है।अतः रावण कर्म कहलायेगा। इस वाक्य में को विभक्ति चिन्ह का भी प्रयोग किया गया है। अतः ये उदाहरण कर्म कारक के अंतर्गत आएगा।

कर्म कारक और सम्प्रदान कारक में अंतर

कर्म कारक और सम्प्रदान कारक में को विभक्ति का प्रयोग होता है। कर्म कारक में क्रिया के व्यापार का फल कर्म पर पड़ता है और सम्प्रदान कारक में देने के भाव में या उपकार के भाव में को का प्रयोग होता है।
मुख्य प्रष्ठ : कारक प्रकरण - विभक्ति
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