लोक के शब्द रूप - संस्कृत


लोक शब्द के रूप (Lok Ke Roop)

लोक शब्द : अकारांत पुल्लिंग संज्ञा , सभी पुल्लिंग संज्ञाओ के रूप इसी प्रकार बनाते है जैसे -देव, बालक, राम, वृक्ष, सूर्य, सुर, असुर, मानव, अश्व, गज, ब्राह्मण, क्षत्रिय, शूद्र, छात्र, शिष्य, दिवस, लोक, ईश्वर, भक्त आदि।

गज के रूप -

विभक्ति

एकवचन 

द्विवचन 

वहुवचन् 

प्रथमा
लोक:
लोकौ
लोका:
द्वतीया
लोकम् 
लोकौ  
लोकान् 
त्रतीया
लोकेन् 
लोकाभ्याम् 
लोकै:
चतुर्थी
लोकाय 
लोकाभ्याम् 
लोकेभ्य:
पञ्चमी
लोकात् 
लोकाभ्याम् 
लोकेभ्य:
षष्ठी
लोकस्य 
लोकयो:
लोकानाम् 
सप्तमी
लोके  
लोकयो::
लोकेषु 
संबोधन 
हे लोक !
हे लोकौ !
हे लोका !

अकारांत पुल्लिंग संज्ञाओ के शब्द रूप

  1. देव (देवता) के शब्द रूप
  2. राम शब्द के रूप
  3. बालक शब्द के रूप
  4. वृक्ष शब्द के रूप
  5. सूर्य के शब्द रूप
  6. सुर शब्द के रूप
  7. असुर शब्द के रूप
  8. मानव के शब्द रूप
  9. अश्व के शब्द रूप
  10. गज के शब्द रूप
  11. ब्राह्मण के शब्द रूप
  12. क्षत्रिय के शब्द रूप
  13. शूद्र के शब्द रूप
  14. भक्त के शब्द रूप
  15. छात्र के शब्द रूप
  16. शिष्य के शब्द रूप
  17. दिवस के शब्द रूप
  18. लोक के शब्द रूप
  19. ईश्वर के शब्द रूप